ट्रेनी आईपीएस ने भेजा प्रस्‍ताव, थानों पर तैनात दारोगा को हर महीने मिले 20 लीटर पेट्रोल

रमेश मिश्र मंडलीय ब्यूरो बस्ती।

बस्ती/लखनऊ। भगीरथ प्रयास न्यूज़ नेटवर्क।
ट्रेनिंग के दौरान थाने पर काम करने का मौका मिला तो आईपीएस ने पुलिसवालों का दर्द समझा। उन्‍होंने थानों पर तैनात पुलिसवालों से हमदर्दी दिखाते हुए हर महीने कम से कम 20 लीटर पेट्रोल दिए जाने की न सिर्फ वकालत की बल्कि उनकी हिमायत में एक प्रस्ताव भी बनाकर भेजा है।
अब इस प्रस्ताव पर पुलिस मुख्यालय को फैसला लेना है अगर प्रस्ताव पास हो गया तो थानों के दारोगाओं को 20 लीटर पेट्रोल का भत्ता मिला करेगा। अभी तक उन्हें सिर्फ दस लीटर पेट्रोल के बराबर भत्ते के रूप में रकम मिलती है। पुलिसवालों के इस दर्द को महसूस कर ऑला अफसरों से साझा करने वाले प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारी विकास कुमार हैं। जिन्होंने न सिर्फ अपने अधिकारियों से दारोगाओं और सिपाहियों की परेशानी बताई बल्कि एक प्रस्ताव भी बनाकर उन्हें सौंपा है। विकास कुमार का तर्क है कि थानों में दरोगा को ज्यादा भागदौड़ करनी पड़ती है। इसके बदले उन्हें भत्ते के रूप में 750 रुपये मिलता है। वहीं थानों के सिपाही बाइक का इस्तेमाल करते हैं लेकिन पाते हैं साइकिल भत्ता के नाम पर प्रति माह दो सौ रुपये।

प्रशिक्षु आईपीएस के प्रस्ताव पर डीआईजी राजेश डी मोढक ने सैद्धांतिक सहमति तो दे दी है लेकिन अन्तिम फैसला मुख्यालय पर ही संभव हो सकेगा। डीआईजी ने भी तय किया है कि वह विकास कुमार की प्रस्ताव को मुख्यालय को भेजे देंगे। प्रशिक्षु आईपीएस विकास कुमार की बतौर थानेदार चिलुआताल में तैनाती थी, इस तैनाती के दौरान उन्होंने अनुभव किया कि दारोगा और सिपाही को कितनी भागदौड़ करनी पड़ती है। डीआईजी राजेश मोडक बताते हैं कि प्रस्ताव मिला है लेकिन उनके स्तर पर इस बारे में निर्णय लिए जाने का अधिकार नहीं है लिहाजा वह सकारात्मक आख्या के साथ उसे पुलिस मुख्यालय को भेज रहे हैं।

सरकारी वाहन को मिलता है तेल

थानों पर दिए गए सरकारी वाहनों को चलाने लिए ही पेट्रोल या फिर डीजल की व्यवस्था की गई है। थानों में ऐसे वाहनों की संख्या काफी कम होती है। थानेदार की गाड़ी सहित दो चार पहिया वाहन के अलावा चार-पांच बाइक से ज्यादा नहीं होती है। सरकारी जीप के लिए 200 लीटर तेल मिलता है जबकि बाइक के लिए 60 लीटर महीने में पेट्रोल मिलता है। थाने के ज्यादातर सिपाही या फिर दारोगा अपनी बाइक से ही चलते हैं। दारोगा को भत्ते के रूप में 750 रुपये मिलता है जबकि सिपाहियों को 200 रुपये का साइकिल भत्ता मिलता है। थाने पर दारोगा और सिपाहियों की भागदौड़ ज्यादा होती है। इस लिहाजा से उनका एक दिन एक लीटर से ज्यादा पेट्रोल खर्च होता है। ऐसे में उन्हें कम से कम महीने में 20 लीटर पेट्रोल देने का आईपीएस विकास कुमार ने प्रस्ताव बनाया था।
चिलुआताल थाने में गश्त और ड्यूटी के हिसाब से आंकलन करते हुए आईपीएस विकास कुमार ने दारोगा और सिपाहियों के पेट्रोल खर्च का प्रस्ताव बनाकर मुझे भेजा था। मेरे स्तर से इस पर फैसला नहीं हो सकता है इसलिए मैने इसे मुख्यालय को भेजने का निर्णय लिया है।

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