कन्हैया मारे किलकारी

ठुमकत आँगन बिच लाल,
जशोदा जायें बलिहारी।
बाबा नन्द हुए खुशहाल,
कन्हैया मारे किलकारी।

किल्हकत कान्ह घुटुरुवन धावत।
भागत दूरि जो मातु बुलावत।
खेलत नन्द गोपाल,
जशोदा जायें बलिहारी।।1।।

कर पहुँची पग पैजनि बाजत।
सुंदर सी द्वै दतियाँ राजत।
अरुण तिलक है भाल।
जशोदा जायें बलिहारी।।2।।

मोरपंख सिर मुकुट विराजत।
मानहुँ कामदेव शुभ साजत।
शोभत नयन विशाल।
जशोदा जायें बलिहारी।।3।।

हाथ लिये प्रभु माखन-रोटी।
शोभित है कटि पीति कछोटी।
रूप निरखत है मनवा निहाल।
जशोदा जायें बलिहारी।।4।।

कर्मराज शर्मा तुकांत अयोध्या
…………………..

वर्ना जैसे करेंगे हमको,वैसा ही भरना होगा

जो सदियों से करते आये,वही हमे करना होगा।
सत्कर्मों को अपनाये हम,बुरे कर्म से डरना होगा।
घुलें मिलें बेशक हम सब से,मर्यादा का ध्यान रखें।
वर्ना जैसे करेंगे हमको,वैसा ही भरना होगा।

हाथ जोड़ प्रणाम नमस्ते,राम राम करते रहिये।
सद्कर्मों से सदा प्रेम वाली,गठरी भरते रहिये।
कौन हमें विचलित कर पायेगा अपनी परिपाटी से।
बनो सुगंधित फूल राह मे अपनो के झरते रहिये।

आलिंगन व चुंबन से ही,प्रेम नही दरसाना है।
ये भी नही जरुरी सबको,बढ कर गले लगाना है ।
सबकी बात सुने हम दिल से,और सबको अपना माने।
नम्र निवेदन और प्रेम से,अपना शीश झुकाना है।

रोग व्याधियां हमसे हारीं,हमने सबको जीता है।
पास हमारे रामायण, बाइबिल,कुरान व गीता है।
समय-समय पर मौत भी हमसे,हार मान कर चली गई।
बीच हमारे आज भी जिन्दा,सावित्री है सीता है।

संयम,नियम करो व्रत पालन,फर्जी रोना-धोना क्या।
मुसकाओ तुम वीर व्रती बन,नाहक नयन भिगोना क्या।
हम ऋषियों के वंशज हैं त्रयलोक्य विजेता कहलाये।
प्रलय नही कुछ कर पाई,कर लेगा क्षुद्र करोना क्या।।

कर्म राज शर्मा तुकान्त अयोध्या

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