जन्माष्टमी की धूम मंदिरों में कोरोना संकट, श्रद्धालुओं की एंट्री पर प्रतिबंध


कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व भादो के महीने की अष्टमी तिथि पर ही मनाया जाता है लेकिन वैष्णव संप्रदाय से जुड़े श्रद्धालु अष्टमी के अगले दिन कन्हैया का जन्मदिन मनाते हैं। मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव बुधवार को धूमधाम से मनाया जाएगा।

नई दिल्ली। भगीरथ प्रयास न्यूज़ नेटवर्क। कोरोना संकट के बीच देशभर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की धूम देखने को मिल रही है। हालांकि, इस बार मथुरा समेत कई जगह पर प्रमुख मंदिरों में श्रद्धालुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध है। ऐसे में श्रद्धालुओं को घर पर ही नंदगोपाल के स्वागत की तैयारी में जुटे हुए हैं। इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी लगातार दो दिन मनाई जाएगी। बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंगलवार को कान्हा का जन्मदिन मनाएंगे। वहीं कई लोग बुधवार को जन्माष्टमी मनाएंगे।

मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की धूम

कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व भादो के महीने की अष्टमी तिथि पर ही मनाया जाता है लेकिन वैष्णव संप्रदाय से जुड़े श्रद्धालु अष्टमी के अगले दिन कन्हैया का जन्मदिन मनाते हैं। मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव बुधवार को धूमधाम से मनाया जाएगा। संभवतः यह पहला अवसर होगा जब भक्त जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण के दर्शन नहीं कर सकेंगे।

मंदिरों में श्रद्धालुओं की एंट्री बैन

श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने बताया कि जिला प्रशासन और ब्रज के सभी मंदिरों के संचालक, सेवायत और प्रबंधकों के बीच हुई वार्ता में कोरोना वायरस महामारी के दिशानिर्देशों के अनुपालन का फैसला लिया गया।
मथुरा-वृन्दावन-गोवर्धन-बरसाना-नन्दगांव-गोकुल-महावन-बलदेव आदि सभी तीर्थस्थलों के मंदिर 10 अगस्त की दोपहर 12 बजे से 13 अगस्त दोपहर बाद तक श्रद्धालुओं के लिए बंद रहेंगे। हालांकि मंदिर के अंदर सेवायत सभी परम्पराएं पूर्ववत सम्पन्न कराते रहेंगे।

मंदिर परिसर में खास तैयारी

श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने बताया कि श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को मनाने के लिए श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर में बड़ी तैयारियां की गई हैं। परिसर के सभी मंदिरों (भगवान केशवदेव मंदिर, श्रीगर्भगृह, श्रीयोगमाया मंदिर और भागवत भवन) को बड़े ही भव्य एवं दिव्य रूप में सजाया गया है।

क्या रहेगा पूरा कार्यक्रम

श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर सरकार द्वारा जारी किए गए दिशा-निर्देशों के अनुपालन में श्रद्धालु इस बार दूरदर्शन और अन्य चैनलों की ओर से टीवी पर सीधे प्रसारण के जरिए श्रीकृष्ण जन्मोत्सव में शामिल हो सकेंगे। उन्होंने जन्माष्टमी पर्व के आयोजनों के संबंध में बताया कि बुधवार को प्रातः दिव्य शहनाई और नगाड़ों के वादन के साथ भगवान की मंगला आरती के दर्शन होंगे। प्रातः 10 बजे भागवत-भवन में युगल सरकार के श्रीविग्रह के श्रीचरणों में दिव्य पुष्पांजलि का कार्यक्रम सम्पन्न होगा। उन्होंने बताया कि जन्माभिषेक का मुख्य और अलौकिक कार्यक्रम रात्रि 11 बजे श्रीगणेश वंदना से शुरू होगा और नवग्रह पूजन कर सम्पन्न होगा।

मध्य रात्रि 12 बजे भगवान के प्रकट होने के साथ कन्हैया की आरती प्रारंभ होगी। इसके बाद केसर आदि सुगन्धित द्रव्यों को धारण किए हुए भगवान श्रीकृष्ण के चल विग्रह मोर्छलासन पर विराजमान होकर अभिषेक स्थल पर पधारेंगे। उन्होंने कहा कि ठाकुरजी के चल श्रीविग्रह का जन्माभिषेक दूध, दही, घी, बूरा, शहद आदि पंचामृत से होगा। साथ ही अन्य शास्त्रोक्त सामग्री का भी उपयोग दिव्य महाभिषेक में किया जाएगा।

पंचांग के अनुसार कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास में अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था.

इस बार पंचांग के अनुसार अष्टमी की तिथि 11 अगस्त यानि आज सुबह 9 बजकर 6 मिनट से आरंभ हो रही है. अष्टमी की तिथि 12 अगस्त को सुबह 11 बजकर 16 मिनट पर समाप्त हो रही है. 11 अगस्त को भरणी और 12 अगस्त को कृतिका नक्षत्र है. इसके बाद रोहिणी नक्षत्र आता है जो 13 अगस्त को रहेगा. इसीलिए कुछ स्थानों पर इस दिन भी जन्माष्टमी का पर्व मनाया जा रहा है.

क्या है शुभ मुहूर्त?

जन्माष्टमी के दिन रात को पूजा करने का समय सही होता है. क्योंकि, भगवान कृष्ण का जन्म आधी रात को ही हुआ था. 12 अगस्त को पूजा का शुभ समय रात 12 बजकर 5 मिनट से लेकर 12 बजकर 47 मिनट तक है. पूजा की अवधि 43 मिनट है.

पूजा की विधि

पूजा से पहले स्नान जरूर करें. इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा का विधान है. पूजा करने से पहले भगवान को पंचामृत और गंगाजल से स्नान जरूर करवाएं. स्नान के बाद भगवान को वस्त्र पहनाएं. ध्यान रहें कि वस्त्र नए हो. इसके बाद उनका श्रृंगार करें. भगवान को फिर भोग लगाएं और कृष्ण आरती गाएं.

वस्त्र खरीदते समय ध्यान दें

आपको ध्यान देना है कि भगवान कृष्ण के लिए आपने जो वस्त्र खरीदे हैं वो नए ही हो. अक्सर दुकानदार पुराने कपड़ों को ही नया बताकर बेच देते हैं. इस बात का आपको जरूर ध्यान रखना है.

जगन्नाथ पुरी में कब मनाई जाएगी जन्माष्टमी

जगन्नाथ पुरी, बनारस और उज्जैन में कृष्ण जन्माष्टमी 11 अगस्त को मनाई जाएगी. क्योंकि 11 अगस्त से अष्टमी तिथि आरंभ होगी.

मथुरा में जन्माष्टमी 12 को

मथुरा और द्वारिका में जन्माष्टमी 12 अगस्त के दिन ही मनाई जाएगी. अधिकतर स्थानों पर 12 अगस्त को ही जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाएगा. इस साल 43 मिनट का पूजा का मुहूर्त है. जो रात्रि 12 बजकर 5 मिनट से 12 बजकर 47 मिनट तक रहेगा. इस मुहूर्त में श्रीकृष्ण जन्म की पूजा कर सकते हैं. यानि कृष्ण जन्मोत्सव का पर्व 12-13 अगस्त की रात में मनाया जाएगा.

12 अगस्त को वृद्धि योग है

जन्माष्टमी का पर्व 12 अगस्त को भी है. इस बार जन्माष्टमी का पर्व बेहद विशेष है. पंचांग के अनुसार इस दिन वृद्धि योग का निर्माण हो रहा है.

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